सुखदेव जी का जीवन परिचय

शहीद क्रान्तिकारी सुखदेव
सत्यम, शिवम, ………..
ब्रह्मा, विष्णु, …………
अमर, अकबर, ……….
भगत सिंह, राजगुरू, ……..
जो खाली जगह है, उसमे क्या शब्द या नाम आयेगा, आप देखते ही बोल सकते है, सुंदरम, महेश, यदि आप फिल्मों के शौकीन है तो एंथोनी बोल सकते है। और अगर आप भारतीय है तो भगत सिंह, राजगुरू के बाद सुखदेव जी का नाम आ ही गया होगा। भगत सिंह, की जहां बात होती है, वहां सुखदेव जी की बात आ ही जाता है।

23 मार्च 1931 की रात, भारत माता के लिए वो काली रात थी, जिस रात भारत माता ने अपने सबसे प्यारे बहादूर, पूरे भारत वासियों के आंखों के तारे भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को खोया था। इसी दिन अंग्रेजो ने तीनों को फांसी पे लटका दिया था। उस रात के बाद पूरे भारत वासियों के जुबा पे भगत सिंह, राजगुरु, और सुखदेव का ही नाम था।

सुखदेव का जन्म और परिवेश

इनका जन्म 15 मई 1907 को पंजाब लुधियाना के नोगरा मुहल्ले में हुआ था। सुखदेव के पिता का नाम रामलाल थापर और माता का नाम का नाम लल्ली देवी था। बचपन मे ही इनके सर से पिता का साया उठ गया था। इनका लालन पालन उसके चाचा अचिंतराम और माता लल्ली देवी ने की।

सुखदेव का क्रान्तिकारी गतिविधि

इनकी पढ़ाई नेशनल कॉलेज में हो रही थी। कॉलेज जीवन में ही सुखदेव हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़ गए थे। सुखदेव लाला लाजपतराय से काफी प्रभावित थे। कुछ ही दिनों में ये हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन पार्टी के पंजाब प्रांत के अध्यक्ष बन गए। और अपनी प्रखर बुद्धि से पार्टी में युवाओं को प्रेरित कर जोड़ते गए और पार्टी को मजबूत बनाते गए। सभी युवाओं में देश भक्ति की आग भरते गए।

सन् 1926 में लाहौर मे सुखदेव ने नौजवान सभा का गठन किए। अंग्रेजो ने भारत की राजनीति में सुधार के लिए एक समिति का गठन किया था, पर उस कमिटी मे एक भी भारतीय सदस्य नहीं थे। इसी के विरोध में सभी क्रान्तिकारी लाला लाजपतराय की अध्यक्षता में अंग्रेजो के खिलाफ प्रर्दशन कर रहे थे, इसी बीच अंग्रेज अधिकारी स्कॉट ने क्रांतिकारियों पे लाठी चार्ज करवा दी जिसमे लाला लाजपतराय की मौत हो गई।

इस घटना से सुखदेव, भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद काफी आहत हुए और इसका बदला लेने के लिए सभी ने मिलकर एक योजना के तहत भगत सिंह, राजगुरु ने स्कॉट को गोली मार कर लाला लाजपतराय का बदला ले लिया। लेकिन बाद में पता चला कि मरने वाला स्कॉट नही सांडर्स था आप समझ सकते है, उस समय अंग्रेजो का विरोध करना मुस्किल था, लेकिन हमारे देश के वीरों की वीरता देखिए गोली मार कर निकल गए। इसी की हत्या के मुख्य आरोपी अंग्रेजो ने भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव और भी कई क्रांतिकारी को बनाया। सुखदेव ने भगत सिंह और राजगुरू को लाहौर से निकलने की सारी योजना बना दिए और कुछ दिन बाद अंग्रेजो ने इनको पकड़ के जेल में डाल दिया।

जेल के दिन

जेल के अंदर भारतीय कैदी को अच्छा खाना नही दिया जाता था। जिससे भारतीय कैदी बीमार हो रहे थे। इसके लिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव ने भूख हड़ताल कर दी| कहा जाता है, कि 63 दिनों तक लगातार भुखे रहे और आंदोलन करते रहे और अंत में अंग्रेजो को झुकना पड़ा।

सुखदेव का सहादत

23 मार्च 1931 को हमारे देश के युवाओं के प्रेरणा स्रोत भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव अपने देश की आज़ादी के लिए हंसते हंसते फांसी पे चढ़ गए। पूरे भारत के लोगो के आक्रोश को देखते हुए अंग्रेजो ने तीनों के शवो को जेल के पीछे के दीवार को तोड़ कर चुपके से जला दिया। इन तीनों महान क्रान्तिकारी को हम कभी नही भूल सकते है, और ना भूलने देंगे ये हमेशा अमर रहेंगे।

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