धनतेरस क्या है और क्यूँ मनाया जाता है ?

धनतेरस

धनतेरस यानी धन की लक्ष्मी ! जिन्हें धन्वन्तरि के अवसर पर भी पूजा किया जाता है।

हिंदू कैलेंडर महीने के कृष्ण पक्ष के तेरहवें चंद्र दिवस पर धनतेरस मनाया जाता है।

इस दिन से हम सभी दीया जलाना शुरु कर देते है, जब तक छठ खत्म नही होता है हर रोज दिया जलाते है।

सबसे बड़ा धन, मन का संन्तोष है!

जिनके पास संतोष है, वह सुखी और स्वस्थ है। आपको सभी को पता ही होगा मन का संतोष सबसे बड़ा धन है।

  • त्योहार का नाम – धनतेरस
  • 2022 की तरीख – 22 अक्टूबर

धनतेरस क्यों मनाया जाता ?

धनतेरस से जुड़ी हुयी बहुत कथायें है। जब समुन्द्र मंथन हो रहा था, तब धन्वन्तरि प्रकट हुवे और उनके एक हाथ में अमृत से भरा कलश तथा दूसरे हाथ मे आर्युवेद का पाठ था।

इसी से भगवान धन्वन्तरि को देवताओं का चिकित्सक भी कहते है।

इसी से इस दिन बर्तन खरीदा जाता है। दीपावली के दिन पूजा करने के लिये लक्ष्मी और गणेश जी की भी मूर्ति खरीदते है।

धनत्रयोदशी के दिन समुन्द्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी दूध के सागर से निकली थी।

इसी से इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा होती है।

जब समुन्द्र मंथन हो रहा था तब उस समय सागर से बहुत कुछ निकला या उत्त्पति हुई थी।

धनतेरस की कथा – प्रथा

लोक कथा के अनुसार एक राजा हिमा थे, जिनके पुत्र की कुंडली में शादी के चौथे दिन मृत्यु की भविष्यवाणी हुई थी।

जब उस बालक की शादी हो गयी तो उसकी पत्नि ने तीसरे दिन के पूरी रात जगाए रखी। अपने सारे सोने और चाँदी के गहने और बहुत से सिक्कें, दीया जलाकर अपने रूम के द्वार पर रख दिया। उसके बाद कहानिया और गीत गाने लगी।

जब शादी का चौथा दिन रात्री 12 बजे के बाद शुरू हुआ तो मृत्यु के देवता यमराज एक सर्प का रूप धारण करके उसके रूम के द्वार पर पहुँचे।

दीयों कि उजाला और गहनो की चमक से उनका आँख चकमका गया और अंधी हो गए। उसके बाद राजकुमार के कक्ष में घुस नही पाये। वही पर गहनों, सिक्के के ढ़ेर पर बैठ कर रात भर गीत और कहानी सुनते रह गये।

फिर सुबह हो गया, मृत्यु का समय निकाल गया। यमराज चुपचाप वापस चले गये।

इस प्रकार नयी दुल्हन ने अपने चतुराई से अपने पति की जान बचा ली। तबसे इस दिन से धनतेरस के त्योहार मनाया जाने लगा।

इस दिन होता क्या है ?

  • ऐसा माना जाता है कि इस दिन अपने धनधान्य सामर्थ्य के हिसाब से नये बर्तन, सोना और चाँदी खरीदना शुभ होता है। जरूरी नही है की यह सभी खरीदें।
  • धातु से बना भी कोई वस्तु खरीद सकते है। इस दिन धन प्राप्ति के लिये कुबेर देवता की पूजा करते है।
  • दीवाली के एक दिन पहले नरक / नर्क चतुर्दशी पड़ता है और 2 दिन पहले धनतेरस पड़ता है।
  • इस दिन हमारे यहाँ लोग बर्तन, चाँदी, सोना और लक्ष्मी जी का फोटो या मूर्ति खरीदते है।
  • अगर जो लोग सोने या चाँदी का कुछ नही खरीद पाते है तो कोई छोटा सा बर्तन खरीद लेते है। फिर दीपावली के दिन उसी बर्तन में मीठा रख कर लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति की पूजा पूरे विधि विधान से करते है।

धन्यवाद !

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